Thursday, April 9, 2009

ओबामा ओबामा ओबामा

ओबामा ओबामा ओबामा

हंगामा हगामा हंगामा

जीतल ओबामा हारल अछि मेकन

हारि गेल पालिन आ जीति गेल बैदन

अमेरिका त सहजे सुकराती नचइये

दुनियाक लोक सेहो फगुआ गबैये

गोरकिक ऊपर करिक्किक भाव बढ़ल

व्हाइट क अखारा मे ब्लैकक दाव लहल

उजरत इराक नै

फ़नकत इरान नै

डूबत ने बैंक कोनो एआईजी की लेहमन

दुनिया मे समताक डंका पिटायत

लादेन के गोरकास इरखा मिटायत

फुटत ने बम कतौ मरत ने लोक कतौ

सस्ते मे तेल आ सस्ते मे गैस भेटत

मरर के बेटा आब नैनो चलायत

सुकनी के देह मे एंजलिना फुलायत

चिबायब ने रोटी खायब आब कूकी

गंगा के बदला पेप्सीए मे नहायब

गेनमाक बेटीके चान पर पठायब

बुधना आब घोंघाके माला ने पहिरत

गीधना ने कहियो भैंसी चरायत

चंडे भाई किनि लेता जींस आ टी शर्ट

भौजी के परसुए हॉलीवुड घुमायब

थीर रहू धीर धरू मोन भरमाऊ नै

पानीए मे माछ अछि कुट्टी लुटाऊ नै

अब्दुल्ला कतेको बेर नाचल अछि

अनठिया बियाह मे

हरबरी मे खेयाली पुलाओ बरकाऊ नै

देखल छथि कार्टर

आ देखले छथि क्लिंटन

देखलहुं अछि बुश आ देखलहुं हुनकर फुस्स

ओबामा के दीया मे तेल कते राखल अछि

ता ओकरे अटकर लगाब त दीअ

ओबामा सनक हाथी परेखए त दीअ

खाइए कते आ बहैये कते

दुलकी चलैये की सरपट भगैये

सम्हारत पाकिस्तान की ढुकत इरान

कोरिया खेहारत की चीन परतारत

काबुल बचायत की पछारत ग रूस

की लेने देने परि रहत हरो पालो थुस्स

2 comments:

jha said...

This is a wonderful poem. It is humourous but at the same time conveys real message and concern. I absolutely loved it.

Gajendra Thakur said...

नव न अर्थ दैत अछि ई कविता।

http://www.videha.co.in/ggajendra@yahoo.co.in